सर्वारिष्ट निवारण स्तोत्र

सर्वारिष्ट निवारण स्तोत्र
ॐ गं गणपतये नमः। सर्व-विघ्न-विनाशनाय, सर्वारिष्ट निवारणाय, सर्व-सौख्य-प्रदाय, बालानां बुद्धि-प्रदाय, नाना-प्रकार-धन-वाहन-भूमि-प्रदाय, मनोवांछित-फल-प्रदाय रक्षां कुरू कुरू स्वाहा।।
ॐ गुरवे नमः, ॐ श्रीकृष्णाय नमः, ॐ बलभद्राय नमः, ॐ श्रीरामाय नमः, ॐ हनुमते नमः, ॐ शिवाय नमः, ॐ जगन्नाथाय नमः, ॐ बदरीनारायणाय नमः, ॐ श्री दुर्गा-देव्यै नमः।।
ॐ सूर्याय नमः, ॐ चन्द्राय नमः, ॐ भौमाय नमः, ॐ बुधाय नमः, ॐ गुरवे नमः, ॐ भृगवे नमः, ॐ शनिश्चराय नमः, ॐ राहवे नमः, ॐ पुच्छानयकाय नमः, ॐ नव-ग्रह रक्षा कुरू कुरू नमः।।
ॐ मन्येवरं हरिहरादय एव दृष्ट्वा द्रष्टेषु येषु हृदयस्थं त्वयं तोषमेति विविक्षते न भवता भुवि येन नान्य कश्विन्मनो हरति नाथ भवान्तरेऽपि। ॐ नमो मणिभद्रे। जय-विजय-पराजिते ! भद्रे ! लभ्यं कुरू कुरू स्वाहा।।
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्-सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।। सर्व विघ्नं शांन्तं कुरू कुरू स्वाहा।।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीबटुक-भैरवाय आपदुद्धारणाय महान्-श्याम-स्वरूपाय दिर्घारिष्ट-विनाशाय नाना प्रकार भोग प्रदाय मम (यजमानस्य वा) सर्वरिष्टं हन हन, पच पच, हर हर, कच कच, राज-द्वारे जयं कुरू कुरू, व्यवहारे लाभं वृद्धिं वृद्धिं, रणे शत्रुन् विनाशय विनाशय, पूर्णा आयुः कुरू कुरू, स्त्री-प्राप्तिं कुरू कुरू, हुम् फट् स्वाहा।।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः। ॐ नमो भगवते, विश्व-मूर्तये, नारायणाय, श्रीपुरूषोत्तमाय। रक्ष रक्ष, युग्मदधिकं प्रत्यक्षं परोक्षं वा अजीर्णं पच पच, विश्व-मूर्तिकान् हन हन, ऐकाह्निकं द्वाह्निकं त्राह्निकं चतुरह्निकं ज्वरं नाशय नाशय, चतुरग्नि वातान् अष्टादष-क्षयान् रांगान्, अष्टादश-कुष्ठान् हन हन, सर्व दोषं भंजय-भंजय, तत्-सर्वं नाशय-नाशय, शोषय-शोषय, आकर्षय-आकर्षय, मम शत्रुं मारय-मारय, उच्चाटय-उच्चाटय, विद्वेषय-विद्वेषय, स्तम्भय-स्तम्भय, निवारय-निवारय, विघ्नं हन हन, दह दह, पच पच, मथ मथ, विध्वंसय-विध्वंसय, विद्रावय-विद्रावय, चक्रं गृहीत्वा शीघ्रमागच्छागच्छ, चक्रेण हन हन, पा-विद्यां छेदय-छेदय, चौरासी-चेटकान् विस्फोटान् नाशय-नाशय, वात-शुष्क-दृष्टि-सर्प-सिंह-व्याघ्र-द्विपद-चतुष्पद अपरे बाह्यं ताराभिः भव्यन्तरिक्षं अन्यान्य-व्यापि-केचिद् देश-काल-स्थान सर्वान् हन हन, विद्युन्मेघ-नदी-पर्वत, अष्ट-व्याधि, सर्व-स्थानानि, रात्रि-दिनं, चौरान् वशय-वशय, सर्वोपद्रव-नाशनाय, पर-सैन्यं विदारय-विदारय, पर-चक्रं निवारय-निवारय, दह दह, रक्षां कुरू कुरू, ॐ नमो भगवते, ॐ नमो नारायणाय, हुं फट् स्वाहा।।
ठः ठः ॐ ह्रीं ह्रीं। ॐ ह्रीं क्लीं भुवनेश्वर्याः श्रीं ॐ भैरवाय नमः। हरि ॐ उच्छिष्ट-देव्यै नमः। डाकिनी-सुमुखी-देव्यै, महा-पिशाचिनी ॐ ऐं ठः ठः। ॐ चक्रिण्या अहं रक्षां कुरू कुरू, सर्व-व्याधि-हरणी-देव्यै नमो नमः। सर्व प्रकार बाधा शमनमरिष्ट निवारणं कुरू कुरू फट्। श्रीं ॐ कुब्जिका देव्यै ह्रीं ठः स्वाहा।।
शीघ्रमरिष्ट निवारणं कुरू कुरू शाम्बरी क्रीं ठः स्वाहा।।
शारिका भेदा महामाया पूर्णं आयुः कुरू। हेमवती मूलं रक्षा कुरू। चामुण्डायै देव्यै शीघ्रं विध्नं सर्वं वायु कफ पित्त रक्षां कुरू। मन्त्र तन्त्र यन्त्र कवच ग्रह पीडा नडतर, पूर्व जन्म दोष नडतर, यस्य जन्म दोष नडतर, मातृदोष नडतर, पितृ दोष नडतर, मारण मोहन उच्चाटन वशीकरण स्तम्भन उन्मूलनं भूत प्रेत पिशाच जात जादू टोना शमनं कुरू। सन्ति सरस्वत्यै कण्ठिका देव्यै गल विस्फोटकायै विक्षिप्त शमनं महान् ज्वर क्षयं कुरू स्वाहा।।
सर्व सामग्री भोगं सप्त दिवसं देहि देहि, रक्षां कुरू क्षण क्षण अरिष्ट निवारणं, दिवस प्रति दिवस दुःख हरणं मंगल करणं कार्य सिद्धिं कुरू कुरू। हरि ॐ श्रीरामचन्द्राय नमः। हरि ॐ भूर्भुवः स्वः चन्द्र तारा नव ग्रह शेषनाग पृथ्वी देव्यै आकाशस्य सर्वारिष्ट निवारणं कुरू कुरू स्वाहा।।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं बटुक भैरवाय आपदुद्धारणाय सर्व विघ्न निवारणाय मम रक्षां कुरू कुरू स्वाहा।।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीवासुदेवाय नमः, बटुक भैरवाय आपदुद्धारणाय मम रक्षां कुरू कुरू स्वाहा।।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीविष्णु भगवान् मम अपराध क्षमा कुरू कुरू, सर्व विघ्नं विनाशय, मम कामना पूर्णं कुरू कुरू स्वाहा।।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीबटुक भैरवाय आपदुद्धारणाय सर्व विघ्न निवारणाय मम रक्षां कुरू कुरू स्वाहा।।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं ॐ श्रीदुर्गा देवी रूद्राणी सहिता, रूद्र देवता काल भैरव सह, बटुक भैरवाय, हनुमान सह मकर ध्वजाय, आपदुद्धारणाय मम सर्व दोषक्षमाय कुरू कुरू सकल विघ्न विनाशाय मम शुभ मांगलिक कार्य सिद्धिं कुरू कुरू स्वाहा।।

एष विद्या माहात्म्यं च, पुरा मया प्रोक्तं ध्रुवं। शम क्रतो तु हन्त्येतान्, सर्वाश्च बलि दानवाः।। य पुमान् पठते नित्यं, एतत् स्तोत्रं नित्यात्मना। तस्य सर्वान् हि सन्ति, यत्र दृष्टि गतं विषं।। अन्य दृष्टि विषं चैव, न देयं संक्रमे ध्रुवम्। संग्रामे धारयेत्यम्बे, उत्पाता च विसंशयः।। सौभाग्यं जायते तस्य, परमं नात्र संशयः। द्रुतं सद्यं जयस्तस्य, विघ्नस्तस्य न जायते।। किमत्र बहुनोक्तेन, सर्व सौभाग्य सम्पदा। लभते नात्र सन्देहो, नान्यथा वचनं भवेत्।। ग्रहीतो यदि वा यत्नं, बालानां विविधैरपि। शीतं समुष्णतां याति, उष्णः शीत मयो भवेत्।। नान्यथा श्रुतये विद्या, पठति कथितं मया। भोज पत्रे लिखेद् यन्त्रं, गोरोचन मयेन च।। इमां विद्यां शिरो बध्वा, सर्व रक्षा करोतु मे। पुरूषस्याथवा नारी, हस्ते बध्वा विचक्षणः।। विद्रवन्ति प्रणश्यन्ति, धर्मस्तिष्ठति नित्यशः। सर्वशत्रुरधो यान्ति, शीघ्रं ते च पलायनम्।।

‘श्रीभृगु संहिता’ के सर्वारिष्ट निवारण खण्ड में इस अनुभूत स्तोत्र के 40 पाठ करने की विधि बताई गई है। इस पाठ से सभी बाधाओं का निवारण होता है।
किसी भी देवता या देवी की प्रतिमा या यन्त्र के सामने बैठकर धूप दीपादि से पूजन कर इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिये। विशेष लाभ के लिये ‘स्वाहा’ और ‘नमः’ का उच्चारण करते हुए ‘घृत मिश्रित गुग्गुल’ से आहुतियाँ दे सकते हैं।

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25 Comments

  1. Posted अगस्त 13, 2008 at 1:25 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    I say this Shabari stotra once a day in the morning

    • shirish
      Posted मार्च 11, 2010 at 11:10 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

      aur aap ise ek din me 40 bar pade nahi to sankalp karke 40 bar pade yani ki roj 1 bar to 40 din……roj 2 bar to 20 din roj 5 bar to 8 days only ………….try this metode this is very use ful i tried so many time………shirish mungikar

  2. Posted जुलाई 26, 2009 at 10:39 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    please send me a detailed note on the works of karnapishachini.

  3. anant
    Posted जुलाई 27, 2009 at 11:45 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    Shatru ka naash hone ke liye muze konse matra ka jjap karna chahiye aaur nyas kaise karte hai

  4. Krishna Mishra
    Posted अक्टूबर 28, 2009 at 10:21 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    Shighra dhan labh ke liye kaun sa mantra sarvsherth hai.

  5. Anirudhan
    Posted दिसम्बर 30, 2009 at 9:22 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    Dear Mr. Singh,

    Please can you provide me with the “सर्वारिष्ट निवारण स्तोत्र” complete in english script.

    Thanks for your kind cooperation.

    With Warm Regards,

    Anirudhan

  6. Posted जनवरी 15, 2010 at 2:01 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    dear sir

    job or dhan prapti or laxmi prapati ka mantr boli ya

  7. Anil Dwivedi
    Posted मार्च 17, 2010 at 1:05 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    Karj se mukti or dhan labh ke liye koun sa mantra sarvasreshtha hoga.

    • premveer
      Posted नवम्बर 8, 2011 at 2:18 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

      me ek ladki se bahut pyar karta hu or usase sadi bhi karna chahata hu ham ek dusare ko jante bhi h or bat bhi karte h mene usase kaha bhi h par usane abhi javav nahi diya plz aap meri madad kare

  8. Posted मार्च 17, 2010 at 8:16 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    this stotra is very good..and gives mental pleasure ,support and relief.. i am reading this since my 8 th standard & now i am in my 18th Standard….i am having very nice anubhav.. whatever strong will (good , not to be taken as bad wish) u consider .. gets fulfilled .. it is a prey indirectly to SHAKTI,navanaaath,dattatrey.. and all devi devatas.. so all get included..

    reply me if u r agreed

    • sonika
      Posted जून 25, 2010 at 8:21 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

      hi,

      Can u pls help me in getting audio file of sarvarishtha nivaran mantra… As i am unable to pronounce properly.

      thanks.

      Sonika

  9. sonika
    Posted जून 18, 2010 at 9:32 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    Sir ,

    Pls. give audio on सर्वारिष्ट निवारण स्तोत्र , b coz kahi kahi galat bola jaata hai…

    Regards
    Sonika

  10. Tapasya
    Posted सितम्बर 9, 2010 at 2:27 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    Namaste,

    can u plzz tell that is this mantra beneficial to attract my husband as he is looking other girl…. or if not then please tell me the correct way….how to attract my husband and how to remove that girl permanently from his life…..

    Thanx

  11. Posted अक्टूबर 20, 2010 at 5:25 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    Iss sarvarishta shabar mantra ka nyas vidhi bataye.

  12. Posted अक्टूबर 20, 2010 at 5:27 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    shabar sarvarishta mantra ka nyas bataye

  13. Posted दिसम्बर 17, 2010 at 11:30 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    pl. inform whether sarwarishta nivaran strotra and shbari kavach are same or different?

  14. Posted दिसम्बर 17, 2010 at 11:32 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    pl.inform whether sarvarishta nivaran stotra and shabari kavach are same or different?

  15. ram bhawan
    Posted अगस्त 9, 2011 at 12:50 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    mai ek ladaki se pyar karata hu.ladaki bhi mujhe chahati hai.hum log sadi karana chahate hai lekin usaka bhai vinod kumar,bap kedar ram,ma dewanti devi nahi chahate hai. koi aisa mantra bataye ki usake bhai,bap,ma man jaye aur asan bhi ho taki mai asani se kar saku

  16. Sameer
    Posted अगस्त 16, 2011 at 10:19 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    Dear Sir,
    pichle 5saal se main dukh aur sirf dukh ka saamna kar raha hu,mujhe jo chahiye wo to mujhe milta hi nahi hai,main paagal ho raha hu please aaap mujhe din accha jaane ka chotasa mantra dedo kyunki main 14hr bahar rahata hu.
    Plz i request u

  17. Posted अक्टूबर 4, 2011 at 1:31 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    sir karz se mukti aur carorpati kaise bane batao jaldi meri halat kharab hoti ja rahi hai

  18. Manoj Pal
    Posted नवम्बर 25, 2011 at 7:07 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    Dear Guru,
    Please tell me Vashikaran Kaat/End karne ka Mantra for my life partner.

  19. arvind pawar
    Posted अगस्त 19, 2013 at 4:43 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    i m arvind pawar

    me apni manokamna purna krna chahta hu

    kripya upryukta upay bataye

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